Sunday, 8 February 2009

क्या है बर्दाश्त की सीमा ?


पाकिस्तान आतंकवाद का गढ़ है और आईएसआई इस गढ़ को मज़बूती प्रदान कर रही है,,रक्षामंत्री ए के एंटोनी और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन के हालिया बयान में कोई नई बात नहीं है, हां ये बयान ऐसे समय आए हैं जब पाकिस्तान मुम्बई में हुई 26/11 घटना की जांच कर रहा है इससे पहले भी सरकार की ओर से ऐसे बयान आते रहे हैं जैसे कि "भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा , अगर पाकिस्तान आतंकियों को नहीं सौंपता तो भारत के सारे विकल्प खुले हैं" ये बयान ठीक वैसे ही बयान हैं जैसा कि संसद पर हमले के बाद तत्कालीन एडीए सरकार ने दिये थे । लेकिन सरकारों ने सिवाय बयानबाज़ी और बर्दाश्त के कुछ नही किया, न ही आतंकी घटनाओं पर लगाम लगी, न ही पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद को रोकने मे कामयाबी मिली। दिल्ली , हैदराबाद, गुजरात, राजस्थान, मुम्बई धमाकों से दहलती रही और केन्द्र एवं राज्य सरकारें आंतरिक सुरक्षा में चूक को लेकर एक दूसरे पर आरोप लगाती रही । लोगों के गुस्से को तत्काल शांत करने के लिये आतंकवाद के खिलाफ लम्बे चौड़े जोशीले भाषण और बयान देती रही ताकि जनता को ये न लगे कि सरकार संवेदनहीन है । लेकिन 26/11 जैसी घटना ने साबित कर दिया कि आतंकी जब चाहें जहां चाहे अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे सकते हैं । घटना की अमेरिका सहित सभी देशों ने कड़ी निंदा की । पाकिस्तान को कड़े शब्दों में अपने यहां चल रहे आतंकी गतिविधियों को खत्म करने और आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कह दिया । विश्व की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी एफबीआई ने पाकिस्तान से चल रहे आतंक के खिलाफ सबूत पेश कर दिये । गृहमंत्री पी चिदम्बरम ने अमेरिका सहित कई शक्तिशाली देशों में जाकर पाकिस्तान के खिलाफ दबाव बनाने की कोशिश की । जिसके बाद थेथर पाकिस्तान भी ये मानने को तैयार हो गया कि मुम्बई हमले में गिरफ्तार कसाब पाकिस्तानी है । भारत ने पाकिस्तान को हमले से सम्बन्धित महत्वपूर्ण डोज़ियर सौंपा जिस पर जांच की बात पाकिस्तान ने कही । अब पाकिस्तान की ओर से ये बातें सामने आ रही है कि 26/11 की आतंकी घटना में पाकिस्तान की किसी एजेंसी की कोई कोई भूमिका नही है हमले की साज़िश भी पाकिस्तान में नहीं रची गई। जिसे पचा पाना किसी के लिये भी कठिन है ये तो वही बात हो गई कि किसी हत्यारे को उसी से जुड़े मामले की जांच करने को कह दिया गया हो । 26/11 की घटना के बाद भारत की ओर से बेहद तल्ख लहज़े में कहा गया कि भारत के सारे विकल्प खुले हैं पीओके में चल रहे आतंकी शिविरों को नष्ट करने पर विचार करने की भी बातें सामने आईं । लेकिन घटना को हुए दो महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है लेकिन सिवाय कसाब की गिरफ्तारी के मामले में कोई प्रगति नहीं हुई । इस बीच गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ लम्बे चौड़े भाषण दे दिये। हर साल की तरह अत्याधुनिक अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित हमारी सेनाओं की सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन भी हो गया। आपकों बता दें कि देश की आन बान और अमन चैन की हिफाज़त के लिये जनता के पैसे रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा बनती हैं इसी यूपीए सरकार 2008-2009 के रक्षा बजट में 10 फीसदी की एतिहासिक वृद्धि की थी । देश में पहली बार रक्षा बजट का आंकड़ा एक लाख करोड़ के पार पहुंच गया। पाकिस्तान की ढीठई बार- बार हमें मूंह चिढ़ा रही है लेकिन हमारी ज़रूरत से ज्यादा दरियादिल सरकार इसे बर्दाश्त कर रही है । आवाम की बर्दाशत की सीमा खत्म होती जा रही है वो बयानबाज़ियां नहीं सुनना चाहती अपने ऊपर लगातार हो रहे आतंकी हमले के खिलाफ कठोर कार्रवाई होते देखना चाहती है लेकिन ऐसा सम्भव नहीं क्योंकि सरकार की बर्दाश्त की सीमा अभी बाक़ी है,,आम चुनाव करीब है इसलिये ये बताने के लिये कि सरकार इस मसले पर गंभीर है कभी किसी मंच से तो कभी किसी चुनावी सभा में हर दिन आपको आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ वही घिसी पीटी तल्ख बयानबाज़ियां सुनने को मिलती रहेंगी ।

1 comment:

  1. Aap :
    http://lalitlekh.blogspot.com

    is blog pe padhen:" Police reforms"..tatha
    http://shamasansmaran.blogspot.com

    pe 'Gazab qanoon"..'Kab hoga ant" ye katha:
    http://shama-kahanee.blogspot.com

    Gar kuchh hona chahiye to hamaree nyay wyawasthame hona chahiye..tatha, ye 150 saal purane,ghise pite qanoon badal jane chahiyen...ek log jagruti kee nihayat zaroorat hai..

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