
बुंदेलखंड का इलाका पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहा है,,यहां की धरती पानी के लिये तरसती रही है लेकिन राजनेताओं को इस पर राजनीति के लिये खूब मौका देती रही है । मायावती सरकार यूं तो 2007 से ही केन्द्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग करती रही है और केन्द्र भी उसे आश्वासन देता रहा है लेकिन मौसम बदलने के
साथ साथ केन्द्र और राज्य सरकार की राजनीति की प्राथमिकताएं भी बदलती रही हैं । दो साल पहले शर्मा कमिटी इलाके का दौरा कर इसके समाधान के लिये अपनी सिफारिशें केन्द्र को सौंप चुकी । लेकिन उस पर कोई अमल नहीं हुआ । कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव से पहले इन इलाकों का दौरा कर काफी सुर्खियां बटोरी । दलितों के घर रात गुजारी उनकी पीड़ा पर संसद में लम्बे चौड़े भाषण दिये । लेकिन ये दौरा राजनीति में "दलित टूरिज्म" से ज्यादा नही था । एक बार फिर बुंदेलखंड खुद के लिये सूखा लाई है और नेताओं के लिये राजनीतिक जमीन । मायावती सरकार ने 58 ज़िले सूखाग्रस्त घोषित कर केन्द्र से मदद की गुहार लगाई है । वहीं कांग्रेस महासचिव के बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण की बात छेड़ दी है जिसका माया सरकार ने विरोध किया है । दरअसल बुंदेलखंड में 37 प्रतिशत दलित हैं। यूपी में दलित आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा बुंदेलखंड में रहता है । यहां कांग्रेस अपना पुराना दलित वोट बैंक मजबूत करना चाहती है जिससे बीएसपी खासी चिंतित है । यूपी में एक दर्जन सीटों पर विधानसभा उपचुनाव होने हैं इसे लेकर हर दल अपने अपने तरीके से इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहा है । लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में जिस बुंदेलखंड की रियासत झांसी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया वह अंग्रेजों के समय भी विकास दूर रहा और आज़ादी के 62 साल बाद भी विकास से दूर है । एक तरफ प्रदेश सरकार मू्तियों और पार्कों के लिये करोड़ों रूपए खर्च कर रही है वहीं किसान तंगहाली में आत्महत्या कर रहे हैं । केन्द्र इन सब के लिये राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है विशेष पैकेज की मांग पर सालों से विचार ही कर रही है और अब बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का नया शिगुफा छोड़ किसे फुसलाने की कोशिश कर रही है वो ही जाने । इन सब के बीच यहां के लोग कभी केन्द्र कभी राज्य सरकार तो कभी आसमान की ओर टकटकी लगाए मदद की बाट ही जोह रहे हैं । हां एक बात तो पक्की है यहां की सूखी धरती में फसल उगे न उगे राजनीति की खेती अच्छी हो रही है ।
Logon me jagruti ho to India zaroor jagegee...!
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आपका ब्लॉग एक अच्छा प्रयास है ।
ReplyDeleteयह सही है कि बुन्देल्खन्ड क्षेत्र के विकास समुचित ढंग से नहीं किय गया । इसी तरह देश के कई अन्य पेछडे इलाके भी हैं, जहां ध्यान देने की जरूरत है लेकिन वहां विकास की प्रक्रिया को तेज करने के लिये नेताओं के पास कोई द्रिशिटि नहीं है । इसी वजह से दस्यु और क्षेत्रीय उग्रवाद जैसी समस्यायें पैदा होती हैं ।
Bahut Barhia... isi tarah likhte rahiye...
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Mithilak Gap...Maithili Me
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Aapke Bheje Photo
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Manpasand Gaane
आधुनिक भारतीय राजनीति की दशा और दिशा की प्रयोगशाला है बुंदेलखंड। ये जो संकेत कर रही है, उसमें ज़ाहिर है कोई संशय नहीं। इसके प्रतिफल को आम लोगों तक ले जाने का, जो और जितना दायित्व (हम) टीवी पत्रकारों का है, वो भी तो टीआरपी में हीं ज़्यादा उलझे रहते हैं। फिर भी इन सबके बीच कोशिश तो हमेशा जारी रहनी चाहिए। आपके इस प्रयास के लिए आप साधुवाद के पात्र हैं।
ReplyDelete--अजीत कुमार
बुंदेलखंड की धरती उर्वरा है
ReplyDeleteकृषि के लिए भी
अगर बारिश हो
हालात सामान्य हों
राजनीति के लिए
हर हालात में
क्षितिज
JAY HO
ReplyDeleteSahee kahaa aapne.
ReplyDelete{ Treasurer-S, T }